महाभारत 14.42.55
कामक्रोधौ भयं मोहमभिद्रोहमथानृतम्इन्द्रियाणां निरोधेन स तांस्त्यजति दुस्त्यजान्
kāmakrodhau bhayaṃ mohamabhidrohamathānṛtamindriyāṇāṃ nirodhena sa tāṃstyajati dustyajān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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