महाभारत 14.43.26
धर्मलक्षणसंयुक्तमुक्तं वो विधिवन्मयागुणानां ग्रहणं सम्यग्वक्ष्याम्यहमतः परम्
dharmalakṣaṇasaṃyuktamuktaṃ vo vidhivanmayāguṇānāṃ grahaṇaṃ samyagvakṣyāmyahamataḥ param
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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