महाभारत 14.43.29
ज्योतिषश्च गुणो रूपं चक्षुषा तच्च गृह्यतेचक्षुःस्थश्च तथादित्यो रूपज्ञाने विधीयते
jyotiṣaśca guṇo rūpaṃ cakṣuṣā tacca gṛhyatecakṣuḥsthaśca tathādityo rūpajñāne vidhīyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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