महाभारत 14.43.38
न सत्यं वेद वै कश्चित्क्षेत्रज्ञस्त्वेव विन्दतिगुणानां गुणभूतानां यत्परं परतो महत्
na satyaṃ veda vai kaścitkṣetrajñastveva vindatiguṇānāṃ guṇabhūtānāṃ yatparaṃ parato mahat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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