महाभारत 14.44.11
अहं प्रजापतीनां च सर्वेषां नात्र संशयःमम विष्णुरचिन्त्यात्मा स्वयंभूरिति स स्मृतः
ahaṃ prajāpatīnāṃ ca sarveṣāṃ nātra saṃśayaḥmama viṣṇuracintyātmā svayaṃbhūriti sa smṛtaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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