महाभारत 14.45.23
अवशेषाणि चान्यानि त्रीणि कर्माणि यानि तुदानमध्ययनं यज्ञो धर्मयुक्तानि तानि तु
avaśeṣāṇi cānyāni trīṇi karmāṇi yāni tudānamadhyayanaṃ yajño dharmayuktāni tāni tu
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें