महाभारत 14.45.2जराशोकसमाविष्टं व्याधिव्यसनसंचरम्देशकालविचारीदं श्रमव्यायामनिस्वनम्jarāśokasamāviṣṭaṃ vyādhivyasanasaṃcaramdeśakālavicārīdaṃ śramavyāyāmanisvanamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें