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महाभारत 14.49.40
शब्दः स्पर्शस्तथा रूपं रसो गन्धश्च पञ्चमःएते पञ्च गुणा भूमेर्विज्ञेया द्विजसत्तमाः
śabdaḥ sparśastathā rūpaṃ raso gandhaśca pañcamaḥete pañca guṇā bhūmervijñeyā dvijasattamāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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