महाभारत 14.5.24
समाश्वसिहि देवेश नाहं मर्त्याय कर्हिचित्ग्रहीष्यामि स्रुवं यज्ञे शृणु चेदं वचो मम
samāśvasihi deveśa nāhaṃ martyāya karhicitgrahīṣyāmi sruvaṃ yajñe śṛṇu cedaṃ vaco mama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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