महाभारत 14.50.49
मया तु भरतश्रेष्ठ चिरदृष्टः पिता विभोतमहं द्रष्टुमिच्छामि संमते तव फल्गुन
mayā tu bharataśreṣṭha ciradṛṣṭaḥ pitā vibhotamahaṃ draṣṭumicchāmi saṃmate tava phalguna
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें