महाभारत 14.55.3
सर्वेषामृषिपुत्राणामेष चासीन्मनोरथःऔत्तङ्कीं गुरुवृत्तिं वै प्राप्नुयामिति भारत
sarveṣāmṛṣiputrāṇāmeṣa cāsīnmanorathaḥauttaṅkīṃ guruvṛttiṃ vai prāpnuyāmiti bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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