महाभारत 14.55.7
तं क्रमेण जरा तात प्रतिपेदे महामुनिम्न चान्वबुध्यत तदा स मुनिर्गुरुवत्सलः
taṃ krameṇa jarā tāta pratipede mahāmunimna cānvabudhyata tadā sa munirguruvatsalaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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