महाभारत 14.56.13
सौदास उवाच · saudāsa uvāca
पत्न्यास्ते मम विप्रर्षे रुचिरे मणिकुण्डलेवरयार्थं त्वमन्यं वै तं ते दास्यामि सुव्रत
patnyāste mama viprarṣe rucire maṇikuṇḍalevarayārthaṃ tvamanyaṃ vai taṃ te dāsyāmi suvrata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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