महाभारत 14.57.12
स भवान्मित्रतामद्य संप्राप्तो मम पार्थिवस मे बुद्धिं प्रयच्छस्व समां बुद्धिमतां वर
sa bhavānmitratāmadya saṃprāpto mama pārthivasa me buddhiṃ prayacchasva samāṃ buddhimatāṃ vara
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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