महाभारत 14.57.39
धमस्वापानमेतन्मे ततस्त्वं विप्र लप्स्यसेऐरावतसुतेनेह तवानीते हि कुण्डले
dhamasvāpānametanme tatastvaṃ vipra lapsyaseairāvatasuteneha tavānīte hi kuṇḍale
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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