महाभारत 14.6.16
प्रत्याख्यातश्च तेनाहं जीवितुं नाद्य कामयेपरित्यक्तश्च गुरुणा दूषितश्चास्मि नारद
pratyākhyātaśca tenāhaṃ jīvituṃ nādya kāmayeparityaktaśca guruṇā dūṣitaścāsmi nārada
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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