महाभारत 14.6.28
तत्र गत्वा यथोक्तं स पुर्या द्वारे महायशाःकुणपं स्थापयामास नारदस्य वचः स्मरन्
tatra gatvā yathoktaṃ sa puryā dvāre mahāyaśāḥkuṇapaṃ sthāpayāmāsa nāradasya vacaḥ smaran
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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