महाभारत 14.60.13
कच्चिन्न विकृतो बालो द्रोणकर्णकृपादिभिःधरण्यां निहतः शेते तन्ममाचक्ष्व केशव
kaccinna vikṛto bālo droṇakarṇakṛpādibhiḥdharaṇyāṃ nihataḥ śete tanmamācakṣva keśava
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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