महाभारत 14.60.33
ईदृशो मर्त्यधर्मोऽयं मा शुचो यदुनन्दिनिपुत्रो हि तव दुर्धर्षः संप्राप्तः परमां गतिम्
īdṛśo martyadharmo'yaṃ mā śuco yadunandiniputro hi tava durdharṣaḥ saṃprāptaḥ paramāṃ gatim
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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