महाभारत 14.60.38
ततः प्रदाय बह्वीर्गा ब्राह्मणेभ्यो यदूद्वहसमहृष्यत वार्ष्णेयी वैराटीं चाब्रवीदिदम्
tataḥ pradāya bahvīrgā brāhmaṇebhyo yadūdvahasamahṛṣyata vārṣṇeyī vairāṭīṃ cābravīdidam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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