महाभारत 14.62.21
ततः प्रदक्षिणीकृत्य शिरोभिः प्रणिपत्य चब्राह्मणानग्निसहितान्प्रययुः पाण्डुनन्दनाः
tataḥ pradakṣiṇīkṛtya śirobhiḥ praṇipatya cabrāhmaṇānagnisahitānprayayuḥ pāṇḍunandanāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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