महाभारत 14.65.10
हृष्टानां सिंहनादेन जनानां तत्र निस्वनःआविश्य प्रदिशः सर्वाः पुनरेव व्युपारमत्
hṛṣṭānāṃ siṃhanādena janānāṃ tatra nisvanaḥāviśya pradiśaḥ sarvāḥ punareva vyupāramat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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