महाभारत 14.65.16
यदुप्रवीर योऽयं ते स्वस्रीयस्यात्मजः प्रभोअश्वत्थाम्ना हतो जातस्तमुज्जीवय केशव
yadupravīra yo'yaṃ te svasrīyasyātmajaḥ prabhoaśvatthāmnā hato jātastamujjīvaya keśava
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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