महाभारत 14.65.2
समयं वाजिमेधस्य विदित्वा पुरुषर्षभःयथोक्तो धर्मपुत्रेण व्रजन्स स्वपुरीं प्रति
samayaṃ vājimedhasya viditvā puruṣarṣabhaḥyathokto dharmaputreṇa vrajansa svapurīṃ prati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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