महाभारत 14.68.3मुहूर्तमिव तद्राजन्पाण्डवानां निवेशनम्अप्रेक्षणीयमभवदार्तस्वरनिनादितम्muhūrtamiva tadrājanpāṇḍavānāṃ niveśanamaprekṣaṇīyamabhavadārtasvaranināditamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें