महाभारत 14.71.13
पृथिवीं पर्यटन्तं हि तुरगं कामचारिणम्कः पालयेदिति मुने तद्भवान्वक्तुमर्हति
pṛthivīṃ paryaṭantaṃ hi turagaṃ kāmacāriṇamkaḥ pālayediti mune tadbhavānvaktumarhati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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