महाभारत 14.72.1
वैशंपायन उवाच · vaiśaṃpāyana uvāca
दीक्षाकाले तु संप्राप्ते ततस्ते सुमहर्त्विजःविधिवद्दीक्षयामासुरश्वमेधाय पार्थिवम्
dīkṣākāle tu saṃprāpte tataste sumahartvijaḥvidhivaddīkṣayāmāsuraśvamedhāya pārthivam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें