महाभारत 14.72.23
तत्र संकलना नास्ति राज्ञामयुतशस्तदायेऽयुध्यन्त महाराज क्षत्रिया हतबान्धवाः
tatra saṃkalanā nāsti rājñāmayutaśastadāye'yudhyanta mahārāja kṣatriyā hatabāndhavāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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