महाभारत 14.73.2
ते समाज्ञाय संप्राप्तं यज्ञियं तुरगोत्तमम्विषयान्ते ततो वीरा दंशिताः पर्यवारयन्
te samājñāya saṃprāptaṃ yajñiyaṃ turagottamamviṣayānte tato vīrā daṃśitāḥ paryavārayan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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