महाभारत 14.76.23
ततो मोहसमापन्नं ज्ञात्वा पार्थं दिवौकसःसर्वे वित्रस्तमनसस्तस्य शान्तिपराभवन्
tato mohasamāpannaṃ jñātvā pārthaṃ divaukasaḥsarve vitrastamanasastasya śāntiparābhavan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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