महाभारत 14.78.21
किरीटिनं तु विव्याध शरेण नतपर्वणाजत्रुदेशे नरव्याघ्रः प्रहसन्बभ्रुवाहनः
kirīṭinaṃ tu vivyādha śareṇa nataparvaṇājatrudeśe naravyāghraḥ prahasanbabhruvāhanaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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