महाभारत 14.78.32स हन्यमानो विमुखं पितरं बभ्रुवाहनःशरैराशीविषाकारैः पुनरेवार्दयद्बलीsa hanyamāno vimukhaṃ pitaraṃ babhruvāhanaḥśarairāśīviṣākāraiḥ punarevārdayadbalīइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें