महाभारत 14.78.34
स बाणस्तेजसा दीप्तो ज्वलन्निव हुताशनःविवेश पाण्डवं राजन्मर्म भित्त्वातिदुःखकृत्
sa bāṇastejasā dīpto jvalanniva hutāśanaḥviveśa pāṇḍavaṃ rājanmarma bhittvātiduḥkhakṛt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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