महाभारत 14.78.39शोकसंतप्तहृदया रुदती सा ततः शुभामणिपूरपतेर्माता ददर्श निहतं पतिम्śokasaṃtaptahṛdayā rudatī sā tataḥ śubhāmaṇipūrapatermātā dadarśa nihataṃ patimइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें