महाभारत 14.78.4
संरक्ष्यमाणं तुरगं यौधिष्ठिरमुपागतम्यज्ञियं विषयान्ते मां नायोत्सीः किं नु पुत्रक
saṃrakṣyamāṇaṃ turagaṃ yaudhiṣṭhiramupāgatamyajñiyaṃ viṣayānte māṃ nāyotsīḥ kiṃ nu putraka
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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