महाभारत 14.8.18
वराय सौम्यवक्त्राय पशुहस्ताय वर्षिणेहिरण्यबाहवे राजन्नुग्राय पतये दिशाम्
varāya saumyavaktrāya paśuhastāya varṣiṇehiraṇyabāhave rājannugrāya pataye diśām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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