महाभारत 14.8.20स्रुवहस्ताय पतये धन्विने भार्गवाय चअजाय कृष्णनेत्राय विरूपाक्षाय चैव हsruvahastāya pataye dhanvine bhārgavāya caajāya kṛṣṇanetrāya virūpākṣāya caiva haइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें