महाभारत 14.80.16
इत्युक्त्वा स तदा राजा दुःखशोकसमाहतःउपस्पृश्य महाराज दुःखाद्वचनमब्रवीत्
ityuktvā sa tadā rājā duḥkhaśokasamāhataḥupaspṛśya mahārāja duḥkhādvacanamabravīt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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