महाभारत 14.80.2
ततः संज्ञां पुनर्लब्ध्वा स राजा बभ्रुवाहनःमातरं तामथालोक्य रणभूमावथाब्रवीत्
tataḥ saṃjñāṃ punarlabdhvā sa rājā babhruvāhanaḥmātaraṃ tāmathālokya raṇabhūmāvathābravīt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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