महाभारत 14.82.2
कच्चित्कुशलकामासि राज्ञोऽस्य भुजगात्मजेमम वा चञ्चलापाङ्गे कच्चित्त्वं शुभमिच्छसि
kaccitkuśalakāmāsi rājño'sya bhujagātmajemama vā cañcalāpāṅge kaccittvaṃ śubhamicchasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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