महाभारत 14.83.15
ततो गाण्डीवभृच्छूरो मागधेन समाहतःबभौ वासन्तिक इव पलाशः पुष्पितो महान्
tato gāṇḍīvabhṛcchūro māgadhena samāhataḥbabhau vāsantika iva palāśaḥ puṣpito mahān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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