महाभारत 14.83.23
तत एनं विमनसं क्षत्रधर्मे समास्थितम्सान्त्वपूर्वमिदं वाक्यमब्रवीत्कपिकेतनः
tata enaṃ vimanasaṃ kṣatradharme samāsthitamsāntvapūrvamidaṃ vākyamabravītkapiketanaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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