महाभारत 14.85.4
वार्यमाणास्तु पार्थेन सान्त्वपूर्वममर्षिताःपरिवार्य हयं जग्मुस्ततश्चुक्रोध पाण्डवः
vāryamāṇāstu pārthena sāntvapūrvamamarṣitāḥparivārya hayaṃ jagmustataścukrodha pāṇḍavaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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