महाभारत 14.89.23
सोऽभिवाद्य पितुः पादौ धर्मराजस्य धीमतःभीमादींश्चापि संपूज्य पर्यष्वजत केशवम्
so'bhivādya pituḥ pādau dharmarājasya dhīmataḥbhīmādīṃścāpi saṃpūjya paryaṣvajata keśavam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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