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महाभारत 14.91.5
शिष्टान्यङ्गानि यान्यासंस्तस्याश्वस्य नराधिपतान्यग्नौ जुहुवुर्धीराः समस्ताः षोडशर्त्विजः
śiṣṭānyaṅgāni yānyāsaṃstasyāśvasya narādhipatānyagnau juhuvurdhīrāḥ samastāḥ ṣoḍaśartvijaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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