महाभारत 14.93.6
काले कालेऽस्य संप्राप्ते नैव विद्येत भोजनम्क्षुधापरिगताः सर्वे प्रातिष्ठन्त तदा तु ते
kāle kāle'sya saṃprāpte naiva vidyeta bhojanamkṣudhāparigatāḥ sarve prātiṣṭhanta tadā tu te
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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