महाभारत 14.93.93
अद्रोहः सर्वभूतेषु संतोषः शीलमार्जवम्तपो दमश्च सत्यं च दानं चेति समं मतम्
adrohaḥ sarvabhūteṣu saṃtoṣaḥ śīlamārjavamtapo damaśca satyaṃ ca dānaṃ ceti samaṃ matam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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