महाभारत 15.1.15
अकरोद्बन्धमोक्षांश्च वध्यानां मोक्षणं तथान च धर्मात्मजो राजा कदाचित्किंचिदब्रवीत्
akarodbandhamokṣāṃśca vadhyānāṃ mokṣaṇaṃ tathāna ca dharmātmajo rājā kadācitkiṃcidabravīt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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