महाभारत 15.16.5
चतुर्भिः पाण्डुपुत्रैश्च भीमार्जुनयमैर्नृपजनक्षयोऽयं नृपते कृतो दैवबलात्कृतैः
caturbhiḥ pāṇḍuputraiśca bhīmārjunayamairnṛpajanakṣayo'yaṃ nṛpate kṛto daivabalātkṛtaiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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