महाभारत 15.2.2
ब्रह्मदेयाग्रहारांश्च प्रददौ स कुरूद्वहःतच्च कुन्तीसुतो राजा सर्वमेवान्वमोदत
brahmadeyāgrahārāṃśca pradadau sa kurūdvahaḥtacca kuntīsuto rājā sarvamevānvamodata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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